महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने शुक्रवार को अपने चार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जबकि 28 अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने दो हुक्का तंबाकू उत्पादक कंपनियों के खिलाफ छापेमारी करने से पहले यह सुनिश्चित नहीं किया कि संबंधित उत्पाद FDA के अधिकार क्षेत्र में आते भी हैं या नहीं।
FDA ने दिसंबर 2025 में भिवंडी स्थित हाई स्ट्रीट इम्पेक्स LLP और जनवरी 2026 में मावल स्थित सोएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के यहां छापेमारी कर प्रतिबंधित फ्लेवर्ड हुक्का और तंबाकू उत्पाद जब्त किए थे। हालांकि, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने स्पष्ट किया कि ये उत्पाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत ‘खाद्य पदार्थ’ की श्रेणी में नहीं आते। इसके बाद राज्य सरकार को अपनी कार्रवाई वापस लेने, जब्त माल छोड़ने और बॉम्बे हाईकोर्ट में बिना शर्त माफी मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शुक्रवार को FDA के अवर सचिव अजीत जगताप की ओर से निलंबन आदेश जारी किए गए। ये आदेश FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे की ओर से पिछले सप्ताह की गई सिफारिशों के आधार पर जारी हुए। FDA सचिव संजय खंदारे ने प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद अंतिम स्वीकृति के लिए सामान्य प्रशासन विभाग और मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजा था।
निलंबन आदेशों के अनुसार, अधिकारियों ने FSSAI या किसी अन्य सक्षम प्राधिकरण से स्पष्ट राय लिए बिना दोनों कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी थी। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि फ्लेवर्ड हुक्का तंबाकू उत्पादों को कानून के तहत खाद्य पदार्थ माना जा सकता है या नहीं।
आदेश में कहा गया है कि कार्रवाई की अनुमति देने से पहले अधिकारियों को निरीक्षण रिपोर्ट, पंचनामे, नमूनों से जुड़े रिकॉर्ड, प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट और फील्ड टीमों की ओर से पेश किए गए प्रस्तावों की स्वतंत्र रूप से समीक्षा करनी चाहिए थी।
लेकिन अधिकारियों ने FSSAI के अधिकार क्षेत्र, उत्पादों की श्रेणी, लेबल पर दी गई जानकारी, उत्पादों के इस्तेमाल के उद्देश्य और प्रस्तावित कार्रवाई की आनुपातिकता की पर्याप्त जांच नहीं की।
आदेश में यह भी कहा गया है कि छापेमारी दल का हिस्सा नहीं रहे कनिष्ठ अधिकारियों को भी जबरन इस अभियान में शामिल किया गया। इसके अलावा, छापेमारी करने वाली टीम ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया।
इन खामियों का खुलासा तब हुआ, जब दोनों कंपनियों ने FDA की कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी। FSSAI की ओर से यह स्पष्ट किए जाने के बाद कि संबंधित उत्पाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के दायरे में नहीं आते, राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि इस मामले में आगे की कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा।
इसके बाद सरकार ने जब्त माल कंपनियों को वापस कर दिया, फैक्टरी की सील खोल दी, कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंध हटा लिए और अदालत में बिना शर्त माफी भी मांगी।
निलंबन आदेशों में कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण से राज्य सरकार की छवि धूमिल हुई है। सरकार ने हाईकोर्ट को यह भरोसा भी दिया था कि मामले में हुई लापरवाही की जांच की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
विभागीय जांच का सामना करने वाले 28 अधिकारियों में शामिल हैं: संयुक्त आयुक्त- श्रीकांत करकाले और दिगंबर भोगावड़े, सहायक आयुक्त- पी. पी. सूर्यवंशी, एन. आर. सुरकुटे, यदुराज दहाटोंडे, एस. बी. कोडगिरे, इमरान हाशमी, जी. पी. कोकणे, आर. आर. काकड़े, ए. आर. देशमुख और पी. वी. अंब्रे, खाद्य सुरक्षा अधिकारी- के. वाई. चिपलूणकर, शुभांगी कर्णे, अशोक इलागोर, सी. आर. स्वामी, माणिक जाधव, ए. जे. टोनपे, मंगेश लवटे, सायली पटवर्धन, ए. जी. गायकवाड़, एस. एस. सावंत, लोहार, सावले सहाय्या, सोनकांबले, हाके, एस. बरवकर और एस. जाजुर्णे और वैज्ञानिक अधिकारी- संतोष उगले।
